क्या एक्सीडेंट महिला या पुरुष देखकर होते है, क्या दोनों के सिर अलग है- हाईकोर्ट

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Yuva Haryana 

Chandigarh (22 March 2018)

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने महिला चालकों को हेलमेट में छूट दिए जाने को लेकर हरियाणा और पंजाब सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने पूछा कि क्या एक्सीडेंट जेंडर देखकर होता है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि पंजाब और हरियाणा में 90% वाहन चालक हेलमेट नहीं पहनते है। सबकी जान की कीमत बराबर होती है महिलाओं के सिर पुरुषों से अलग नहीं होते है।

कोर्ट ने बिना हेलमेट वाहन चालकों के चालान का डाटा तलब किया है जिसमें अगली सुनवाई 5 अप्रैल को होगी। जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल की बेंच ने पूछा कि नियमों को सख्ती से लागू क्यों नहीं किया जा रहा है। चंडीगढ़ से बाहर निकलते ही पंजाब और हरियाणा में लोग हेलमेट पहनने की जरूरत ही तक नहीं समझते। दोपहिया पर तीन लोग आमतौर पर देखे जा सकते हैं।

लॉ रिसर्चर अनिल सैनी ने चीफ जस्टिस को लिखे पत्र में कहा कि दोपहिया चलाने वाली महिलाओं को हेलमेट पहनने से छूट क्यों दी गई है। क्या सड़क पर सुरक्षा कानून पुरुषों के लिए ही है। कोई भी धर्म सुरक्षा कानून से बड़ा नहीं हो सकता। हाईकोर्ट से मांग की गई है कि जो सिख महिलाएं पगड़ी नहीं पहनती हैं उनके लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाए। इसके लिए मौजूदा मोटर व्हीकल एक्ट में जरूरी बदलाव की मांग भी की गई है। पत्र में कहा गया कि हरियाणा ने महिलाओं को हेलमेट पहनने से भले ही छूट नहीं दी है लेकिन वहां इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा।

 

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