बिना पानी गेहूं की अच्छी फसल ले रहे हैं मेवात के किसान, वो भी बाकी राज्य से 15 दिन पहले

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प्रदेश में जहां नहरी पानी के लिये हाहाकार मचा रहता है, वहीं नूंह जिले के गांव मढी में गेहूं, सरसों सहित अन्य कई फसलें सदियों से बिना पानी के पैदा हो रही है। यहां फसलें मेवात के अन्य गावों से 20-25 दिन पहले पक कर तैयार हो जाती है। फिलहाल मेवात जिले के अन्य गांवों में जहां गेहूं की फसल हरी खड़ी है, वहीं गांव मढी के लोग गेहूं की फसल की कटाई ही नहीं कर रहे बल्कि कुटाई कर नई गेहूं की रोटी भी खाना शुरू कर दिया है।
एक कमाल की बात यह है कि गांव मढी में एक भी डीजल इंजन, बिजली के टयूबवैल कनेक्शन और नहरें नही हैं। गांव में गेंहू आदि की फसल 15 मार्च से पहले ही कट जाती है। गांव के कुछ लोग इसे एक बुजर्ग फकीर की दुआ मान रहे है। ऐसा भी नहीं है कि बिना सिंचाई के फसल कम होती हो। अन्य गांवो की तरह यहां भी एक एकड़ खेत में 30 से 40 मण तक गेहूं पैदा होता है।
किसानों का कहना है कि उनके गांव में जमीनी पानी कड़वा है जो फसल के लिये मुफीद नहीं है। गांव में अगर नहरी पानी का इंतजाम हो जाये तो गांव मढी के किसान भी अन्य गांव वालों की तरह साल में तीन-तीन फसलें पैदा कर सकते हैं। लेकिन उनके गांव के लोग बस एक बार ही फसल ले पाते हैं।

कौन-कौन सी फसल होती हैं
गांव में मसूर, चना, मटर, गेहूं, ज्वार, बाजरा की फसल मुख्य तौर से होती है। मढी गांव के तैसब हुसैन ने दो एकड जमीन में बेर का एक बाग लगा रखा है। लेकिन पानी की कमी के चलते वह 700 रूपये का एक टेंकर पानी डलवाते हैं। उनका कहना है कि अगर जमीनी पानी दे दिया तो बेर की फसल जल कर राख हो जाती है।

क्या कहते है कृषि अधिकारी
गांव मिंडकौला स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के प्रोजेक्ट ऑफिसर डाक्टर अली खान ने बताया कि जिस जमीन में जीवांश तत्व मौजूद हों या फिर जमीन से करीब चार फीट नीचे ऐसी कठोर कंकरीट की परत हो जो पानी को नीचे जाने ना दें तो ये संभव है कि बिना सिंचाई के फसल हो सकती है। उन्होने कहा कि जीवांश तत्व और कंकरीट की परत की वजह से जमीन में नमी बनी रहती है। उन्होंने कहा कि मढी गांव की जमीन की जांच कराई जाएगी कि वो कौन से तत्व हैं जिसके कारण बिना पानी के फसल हो रही है।

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