1 जून से 10 जून तक छुट्टी पर जाएंगे किसान, तो शहरी होंगे परेशान

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Yuva Haryana

Panchkula (20 April 2018)

अब शहरी लोगों के परेशानी बढ़ने वाली है क्यूंकि हरियाणा में किसान 10 दिनों की छुट्टी पर जाने वाले हैं। प्रदेश के किसान अब 10 दिन शहरों में कदम नहीं रखेंगे। जी हां ये एक नायाब तरीका निकाला है किसानों ने अपने विरोध का। कर्ज माफी, फसलों के पूरे दाम और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू कराने के लिए किसानों ने इस बार यह तरीका अपनाया है।

1 जून से 10 जून तक गांवों से न कोई किसान शहर जाएगा और न फल-सब्जियों, दूध और अनाज की सप्लाई होगी। यानी किसान पूरी तरह छुट्टी पर रहेंगे।  राष्ट्रीय किसान महासंघ के आह्वान पर 90 किसान संगठनों ने ग्राम बंद का एलान कग दिया है। इससे एक बार फिर किसान आंदोलन खड़ा हो सकता हैं। साथ ही शहरों में जरूरी खाद्य पदार्थों की किल्लत होने का खतरा भी बढ़ सकता है। साथ ही बंद के दौरान 6 जून को पिछले साल मध्य प्रदेश के मंदसौर में मारे गए 6 किसानों की आत्मिक शांति के लिए हवन और श्रद्धांजलि सभाएं भी की जाएंगी। इसके बाद 10 जून को भारत बंद होगा।

राष्ट्रीय किसान महासंघ की कोर कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि घोषणाओं और योजनाओं के नाम पर किसानों के साथ छलावा किया जा रहा है। आज भी कर्ज तले दबा किसान आत्महत्या कर रहा है, लेकिन सरकारें उसकी सुध लेने को तैयार नहीं। वर्ष 2013 से 2016 तक देश के 22 पूंजीपतियों का 17.15 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर दिया, लेकिन किसानों पर करीब 12.60 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ नहीं किया जा रहा।

ग्राम बंद को लेकर राष्ट्रीय किसान महासंघ के बैनर तले हरियाणा के पांच किसान संगठन सक्रिय हो गए हैं। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी), किसान संघर्ष समिति, राष्ट्रीय किसान संगठन, भाकियू (आर्य) और भाकियू (अ) ने किसानों को मुहिम से जोडऩे के लिए सोशल मीडिया पर अभियान छेड़ दिया है। 6 जून को किसान संगठनों के प्रतिनिधि मंदसौर जाएंगे और वहां पुलिस फायरिंग में मारे गए किसानों को शहीद का दर्जा देते हुए उन्हें श्रद्धांजलि देंगे।

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