दुर्घटना पीड़ितों को बचाना सबका काम, फिर क्यों संवेदनाओं से मुंह मोड़ रहा इंसान ?

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अक्सर हमें दूसरों की सहायता करने और एक-दूसरे के काम आने की बातें तो बहुत सुनने को मिलती है, लेकिन क्या वास्तविक जिंदगी में हम एक दूसरे की सहायता करते हैं या नहीं, इसका पता तब चलता है जब हमारी आंखों के सामने कोई तड़पता है।

रोहतक से वरिष्ठ पत्रकार धीरेंद्र चौधरी ने अपनी फेसबुक वॉल पर एक घटना शेयर की है. जिसमें उन्होने लिखा है कि एक मजदूर को तेज रफ्तार बस रौंद कर चली जाती है, लोग वहां इक्कट्ठे होते रहते हैं, लेकिन सहायता कोई नहीं करता ।

जब लोग वहां पर इक्कट्ठे होते रहे और भीड़ बढ़ती गई लेकिन सहारा कोई नहीं बना, आखिरकार पत्रकार धीरेंद्र चौधरी वहां पर पहुंचे और घायल शख्स को अस्पताल पहुंचाया ।

अब सोशल मीडिया पर अलग-अलग लोगों के अलग-अलग प्रकार के विचार भी आ रहे हैं।

यह कोई पहली घटना नहीं है, काफी जगह पर ऐसी और भी घटनाएं सामने आती है. लेकिन समाज में कोई भी इंसान सहायता करने के लिए कोई नहीं आता।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार अगर कोई भी शख्स दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल लेकर जाता है तो सहायता करने वाले से किसी प्रकार की कोई पूछताछ नहीं करने के निर्देश जारी किये गए हैं।

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