Home Breaking राष्ट्रपति के अंगरक्षक के तौर पर केवल तीन जातियां ही क्यों, जानिए केंद्र सरकार का जवाब…

राष्ट्रपति के अंगरक्षक के तौर पर केवल तीन जातियां ही क्यों, जानिए केंद्र सरकार का जवाब…

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Yuva Haryana

Chandigarh, 19 July 2019

 

राष्ट्रपति के अंगरक्षक के तौर पर केवल जाट, जट, सिख और राजपूतों को ही नियुक्ति देने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। इस मामले में केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में कहा कि राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की अलग से भर्ती नहीं होती है। आर्मी से ही कार्य के अनुरूप टुकड़ियों को बांटा जाता है और उनको ही नियुक्ति दी जाती है। ऐसे में राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में जातिवाद का आरोप पूरी तरह से गलत है।

गौरतलब है कि इस मामले में याचिका दायर करते हुए छात्र सौरव यादव ने हाईकोर्ट को बताया कि हमारे संविधान में प्रत्येक नागरिक को बराबरी का हक और जाति, रंग, क्षेत्र आदि के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं किए जाने का प्रावधान है। लेकिन इन सबके बीच राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए गार्ड की नियुक्ति में ही जाति के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है।

याचिका में कहा गया कि आजादी के बाद से लेकर आज तक राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए केवल जाट, जट, सिख और राजपूत जाति के लोगों को ही रखा जाता है। ऐसा करना सीधे तौर पर संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है। इस दलील के साथ उन्होंने डायरेक्टर आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस द्वारा हाल ही में की जा रही नियुक्ति की प्रक्रिया को रद करने की अपील की है। केंद्र सरकार ने कहा कि नियुक्ति करते हुए जाति नहीं, बल्कि क्लास देखी जाती है। कद और अन्य मानक पूरे करने वालों को इस दस्ते में स्थान मिल सकता है और जाति की कोई शर्त नहीं है।

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