रेसलर साक्षी मलिक का दर्द उभर कर सामने आया, विजेता खिलाडि़यों को पहले की तरह मिलना चाहिए मान-सम्मान

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Pradeep Dhankhar

Yuva Haryana

हरियाणा सरकार की खेल नीति को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब इंटरनेशनल रेसलर साक्षी मलिक का दर्द उभर कर सामने आया है। साक्षी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में रेसलिंग में 62 किलोग्राम वर्ग में ब्रांज मेडल जीता था। हरियाणा सरकार के सम्मान समारोह का विरोध करने वालों में वह भी शामिल थी। अब उन्होंने खुलकर अपनी बात सामने रखी है। साक्षी का कहना है कि विजेता खिलाडि़यों को पहले की तरह मान-सम्मान मिलना चाहिए। मान-सम्मान न मिलने से खिलाडि़यों का मनोबल गिरता है।

हरियाणा सरकार की खेल नीति का विरोध करने वालों में जानी-मानी रेसलर साक्षी मलिक भी शामिल हैं। वे रेलवे की ओर से खेलती हैं। साक्षी ने वर्ष 2016 में हुए ओलंपिक में कांस्य पदक हासिल किया था। भारत के लिए रेसलिंग में पदक जीतने वाली वे पहली महिला पहलवान थी। यह पदक जीतने पर हरियाणा सरकार ने साक्षी का जोरदार स्वागत और सम्मान किया था। इससे पहले उन्होंने वर्ष 2014 में कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीता था।

साक्षी मलिक ने मौजूदा विवाद पर कहा कि नौकरी तो वे पहले से ही कर रहे हैं। इसलिए मान-सम्मान भी पहले की तरह होना चाहिए। जब उन्होंने ओलंपिक में पदक जीता था, तब भी वे रेलवे में नौकरी कर रही थी, लेकिन हरियाणा सरकार ने पूरा मान-सम्मान दिया था। इसलिए अब भी उसी तरह का मान-सम्मान होना चाहिए। साक्षी ने कहा कि मान-सम्मान मिलेगा तो एशियन गेम्स में और बेहतर करने की सोचेंगे।

बता दें कि हरियाणा सरकार को कॉमनवेल्थ गेम्स के कुछ पदक विजेता खिलाडि़यों के विरोध के चलते पंचकूला में सम्मान समारोह रद्द करना पड़ा था। इन खिलाडि़यों ने अपनी पुरस्कार राशि में कटौती किए जाने के सरकार के निर्णय का विरोध जताया था।

दरअसल हरियाणा सरकार की खेल नीति में उन्हीं खिलाडि़यों के लिए पुरस्कार राशि का प्रावधान है, जो मूल रूप से हरियाणा के निवासी हों और संबंधित खेल प्रतिस्पर्धाओं में हरियाणा का प्रतिनिधित्व किया हो। कॉमनवेल्थ गेम्स में हरियाणा से संबंध रखने वाले 22 खिलाडि़यों ने पदक जीत थे। इनमें से 13 खिलाड़ी ऐसे थे, जो हरियाणा की बजाय दूसरी एजेंसियों से खेले थे।

ऐसे में हरियाणा सरकार ने खेल नीति में विशेष प्रावधान कर शर्त लगा दी। जिसके तहत ऐसे खिलाडि़यों को भी पुरस्कार राशि दी जाएगी, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से पुरस्कार राशि में से उतनी राशि काट ली जाएगी, जितनी राशि संबंधित एजेंसी से सम्मान एवं पुरस्कार स्वरूप मिलेगी। हरियाणा सरकार के इसी निर्णय पर इन खिलाडि़यों को आपत्ति थी।

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