दिव्यांग ने पहली ही राष्ट्रीय जूडो में जीता रजत पदक, तालाब में तैरता देख कोच ने करवाई थी तैयारी

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Yuva Haryana, Kaithal

अपने करियर की पहली नेशनल प्रतियोगिता में ही रजत पदक हासिल करना और वो भी एक ऐसे खिलाड़ी का जो ना सुन सकता है और ना ही कुछ बोल सकता है।  केवल इशारों में ही खेल सीख रहा है, ऐसे खिलाड़ी ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर कुछ ही महीनों में नेशनल स्तर की प्रतियोगिता में मेडल हासिल कर लिया है।

यह खिलाड़ी है कुलतारण गांव निवासी 23 वर्षीय कुलदीप। जिसने 31 जनवरी से दो फरवरी तक पंजाब के आनंदपुर साहिब में हुई सीनियर नेशनल जूडो डैफ प्रतियोगिता में यह उपलब्धि हासिल की है। आपको बता दें इस प्रतियोगिता में मूक बधिर खिलाड़ी ही भाग लेते हैं।

इससे पहले भी 20 और 21 जनवरी को गुरुग्राम में हुई सीनियर स्टेट जूडो डैफ प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया है। हरियाणा खेल विभाग की ओर से नेशनल स्तर की प्रतियोगिता में मेडल लाने पर सी-ग्रेड का सर्टिफिकेट दिया जाता है। अब यह सर्टिफिकेट कुलदीप को भी मिल जाएगा।

कुलदीप एक गरीब परिवार से हैं। भैंस का दूध बेचकर ही परिवार का पालन पोषण कर रहा है। इसके अलावा दो एकड़ जमीन है और खेतीबाड़ी का काम भी स्वयं करता है। पांच साल पहले ही कुलदीप के पिता जोगीराम की मौत हो गई थी। बड़ा भाई मनदीप एक केमिस्ट की दुकान पर काम करता है। परिवार के आर्थिक हालात ठीक नहीं हैं, लेकिन अब कुलदीप ने जूडो में किस्मत आजमाने का मन बना लिया है।

कुलदीप को उसके गांव के बॉक्सिग कोच अमरजीत ने कई बार कुलदीप को गांव के तालाब में तैराकी करते हुए देखा। वह बहुत ही कम समय में तालाब को पार कर देता है। यह देखकर कोच अमरजीत मन में ठानी कि कुलदीप को किसी भी खेल में लेकर जाएंगे। उसने कुलदीप के भाई मनदीप से बात की और उसे जूडो सीखने के लिए जूडो कोच जोगिद्र सिंह के पास भेज दिया। अब वह छह महीने से अंबाला रोड स्थित इंडोर खेल स्टेडियम में सुबह-शाम जूडो का अभ्यास करता है।

कुलदीप के कोच जोगिद्र सिंह व संदीप ने बताया कि कुलदीप इशारों में ही खेल का अभ्यास कर रहा है। शुरूआत में काफी परेशानी भी हुई, लेकिन अब इशारों को समझने लगा है। एक या दो बार बताने से ही किसी भी दांव पर अपनी पकड़ बना लेता है।

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