Home Breaking 10 रुपये में श्रमिकों को मिलेगा भरपेट खाना, चार और शहरों में खुलेगी कैंटीनें

10 रुपये में श्रमिकों को मिलेगा भरपेट खाना, चार और शहरों में खुलेगी कैंटीनें

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 28 June, 2018

हरियाणा के श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि श्रमिकों को 10 रूपए में सस्ता खाना उपलब्ध करवाने के लिए अब पंचकूला, अंबाला, पानीपत, करनाल तथा भिवानी में जल्द ही ऐसी कैंटीनें आरंभ की जाएंगी। इससे पूर्व यह रियायती कैंटीन सोनीपत, गुरुग्राम, यमुनानगर, फरीदाबाद व हिसार में चल रही हैं।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में भवन निर्माण कार्यों से जुड़े श्रमिकों के लिए विभाग द्वारा 2 से 31 जुलाई तक पंजीकरण अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रमिक अपना पंजीकरण करवाएं और विभाग की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाएं। पिछली सरकारों ने भवन एवं अन्य सन्निमार्ण कर्मकारों का उपयोग केवल वोट बैंक के लिए किया। श्रमिकों के हित में कुछ नहीं किया।

सैनी आज श्रम कल्याण विभाग ने बताया कि इस अभियान के तहत वे स्वयं भी विभाग के अधिकारियों के साथ श्रमिकों का पंजीकरण करवाने के लिए विभिन्न शहरों के लेबर चौंक पर जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत दूसरे चरण में निर्माण स्थल पर श्रमिकों का पंजीकरण करवाया जाएगा और तीसरे चरण में गांवों में निर्माण स्थलों का दौरा कर श्रमिकों का पंजीकरण किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार के 26 अक्तूबर 2014 को सत्ता में आने से  पहले भवन निर्माण से जुड़े केवल 7497 मजदूरों का ही पंजीकरण था जो अब बढ कर 1 लाख 20 हजार 908 तक पहुंच गया है। वर्ष 2018-19 में 31 मई तक श्रमिकों को विभाग की योजनाओं के तहत 100 करोड़ रूपए तक का लाभ दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए 23 कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान भवन निर्माण से जुड़े श्रमिकों के कल्याण के लिए 329.27 करोड़ रूपए की राशि खर्च की जा चुकी है जबकि 2014 से पहले पिछली सरकारों द्वारा चाहे वह 10 वर्ष तक कांग्रेस की सरकार हो या उससे पहले इनेलो की केवल 28.55 करोड़ रूपए की ही राशि खर्च की गई थी जो इस बात का प्रमाण है कि पिछली सरकारों ने इस वर्ग का उपयोग केवल वोट बैंक के रूप में ही किया।

हरियाणा प्रदेश मे लगभग 10-12 लाख निर्माण श्रमिक काम करते हैं लेकिन अब तक लगभग 7.5 लाख निर्माण श्रमिक ही बोर्ड द्वारा पंजीकृत किये गये हैं, जिनमें से केवल 4,65,000 श्रमिकों की सदस्यता जारी हैं। इससे स्पष्ट है कि अभी भी इस वर्ग का एक बहुत बड़ा हिस्सा पंजीकृत न होने की वजह से बोर्ड द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित हैं।

उन्होंने बताया कि इस अभियान के दौरान लोक निर्माण, सिंचाई, मंडी बोर्ड जैसे अन्य सरकारी निर्माण विभागों को भी जोड़ा गया हैं तथा इन विभागों में कार्य कर रहे सभी श्रमिकों को पंजीकृत करने के लिए सम्बन्धित विभाग का सहयोग लिया जा रहा हैं।

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