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Haryana में महिलाओं को मिलेगी कंप्यूटर शिक्षा, सरकार की ये है योजनाएं

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Yuva Haryana News

Chandigarh, 31 Oct, 2020

हरियाणा के मुख्य सचिव विजय वर्धन ने कहा कि गांवों में बनाए गए सामुदायिक भवनों में महिला स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों के लिए कम्प्यूटर की व्यवस्था की जाए ताकि इन समूहों से जुड़ी महिलाएं कम्प्यूटर की बेसिक जानकारी हासिल कर सकें। इसके अलावा, ऐसे और अधिक स्थानों की पहचान की जाए, जहां इन समूहों द्वारा कैंटीन चलाई जा सके।

मुख्य सचिव ने आज यहां ग्रामीण विकास तथा विकास एवं पंचायत विभागों की योजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान यह बात कही। इन दोनों विभागों के प्रधान सचिव सुधीर राजपाल ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से मुख्य सचिव को इन विभागों द्वारा चलाई जा रही मुख्य योजनाओं की संक्षिप्त जानकारी दी। विभाग के निदेशक हरदीप सिंह समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।

इस दौरान मुख्य सचिव विजय वर्धन को अवगत करवाया गया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत सितंबर 2020 तक 93.14 लाख मानव दिवस हासिल किए गए और वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 4.89 लाख व्यक्तियों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध करवाया गया। इस स्कीम के तहत व्यक्तिगत श्रेणी के अंतर्गत वर्ष 2020-21 के दौरान 40 हजार पशु शैड बनाने का लक्ष्य है।

इसी तरह, सामुदायिक श्रेणी के तहत प्रत्येक जिले में 100 एकड़ पंचायती भूमि पर बागवानी पौधारोपण, हर जिले में 200 परम्परागत तालाबों को चौड़ा करने, महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए 2 लाख रुपये प्रति शैड की दर से प्रत्येक ब्लॉक में 5 शैड बनाने और लगभग 500 करोड़ रुपये से संबंधित विभागों के लेबर कन्वर्जेंस का लक्ष्य है। इसके अलावा, स्कूल प्ले ग्राउंड, तालाबों या जोहड़ों, ड्रेनों की सफाई, सभी ग्राम पंचायतों तथा जन-स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सप्लाई व स्टोरेज टेंकों के रख-रखाव को भी इस स्कीम के तहत लाया जाएगा।

इस दौरान यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण के तहत अब तक लगभग 284.88 करोड़ रुपये की लागत से 20423 मकानों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है जबकि 496 मकानों का कार्य शेष है। इस योजना के तहत प्रत्येक यूनिट के लिए मनरेगा के अंतर्गत मैदानी क्षेत्रों में 3 किस्तों में 1.20 लाख रुपये, 18 हजार टॉप अमाउंट, शौचालय के लिए 12 हजार रुपये तथा 90 मानव दिवसों के लिए 28 हजार रुपये की राशि दी जाती है।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुअर्बन मिशन- राष्ट्रीय रुअर्बन मिशन के तहत रुअर्बन कलस्टर विकसित किए जा रहे हैं। यह कलस्टर लगभग 25 हजार से 50 हजार तक की आबादी वाले भौगोलिक रूप से साथ लगती ग्राम पंचायत या कलस्टर है। केंद्र सरकार द्वारा मुलाना, समैण, बादली, उचाना खुर्द, बल्ला, कौसली, गणेशपुर, तिगांव, सिवा और सिंगार के रूप में ऐसे 10 कलस्टर स्वीकृत किए गए हैं। इस स्कीम के तहत इन कलस्टरों में सार्वजनिक परिवहन, सामुदायिक केंद्र, गांवों की स्ट्रीट लाइट और कौशल विकास जैसे घटक शामिल किए गए हैं।

बैठक में इस बात की भी जानकारी दी गई कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास स्कीम (एमपीलैड) के तहत प्रत्येक सांसद द्वारा प्रतिवर्ष 2 समान किस्तों में 5 करोड़ रुपये की राशि पेयजल, प्राथमिक शिक्षा और सडक़ों आदि के लिए दी जाती है। इस स्कीम के तहत 22.5 प्रतिशत खर्च अनुसूचित जाति की आबादी वाले क्षेत्रों में करना जरूरी है। इसी तरह, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत अवक्रमित प्राकृतिक स्रोतों के संरक्षण व विकास, बरसाती पानी के संग्रहण और भू-जलस्तर की रिचार्जिंग की कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं।

इस दौरान इस बात की भी जानकारी दी गई कि इस समय प्रदेश में 40,459 स्वयं सहायता समूह कार्यरत हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा इस समय विभिन्न मंडियों में 25 कैंटीन चलाई जा रही हैं। जबकि जिला झज्जर के 2 खंडों में 594 एकड़ पंचायती भूमि पर खेती भी की जा रही है। इसके अलावा, इन समूहों के सदस्यों द्वारा 29 वाहन भी चलाए जा रहे हैं। इन स्वयं सहायता समूहों द्वारा कोविड-19 के दौरान 47 लाख 50 हजार मास्क, 79,992 पीपीई किट्स, 2,70461 बोतल हैंड सेनेटाइजर और 2069 बोतल हैंडवॉश भी तैयार किया गया।

इसी तरह, ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं (अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और दिव्यांगों) को कौशल प्रशिक्षण देने के मकसद से दीन दयाल उपाध्याय ग्राम कौशल योजना चलाई जा रही है। यह योजना पीपीपी मॉडल पर चलाई जा रही है और प्रतिष्ठिïत पेशेवर एजेंसियों व संस्थानों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव श्री विजय वर्धन को अवगत करवाया गया कि विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा चलाई जा रही स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण योजना के तहत मुख्य तौर पर तीन घटक हैं। इनमें व्यक्तिगत घरेलू शौचालय, कम्यूनिटी सैनेटरी कॉम्पलेक्स और सूचना शिक्षा एवं संचार शामिल हैं।

स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण- 2019 में हरियाणा ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया और उत्तर भारत में सबसे स्वच्छ राज्यों की श्रेणी में अग्रणी रहा। प्रदेश के 22 जिलों में 390.57 करोड़ रुपये मूल्य की 1395 ठोस तथा तरल कचरा प्रबंधन परियोजना स्वीकृत की गई है इनमे से 737 ठोस कचरा प्रबंधन तथा 552 तरल कचरा प्रबंधन परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।

गोबरधन स्कीम के तहत जिला हिसार के गांव नया गांव में बायोगैस प्लांट का निर्माण किया गया है। पाइप लाइन के माध्यम से लगभग 150 परिवारों को बायोगैस कनेक्शन दिए गए हैं। वर्ष 2020-21 के लिए प्रत्येक जिले में एक-एक गोबरधन परियोजना लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हर महीने प्लास्टिक इक्ट्ठा किया जाएगा, जिसे लोक निर्माण (भवन एवं सडक़ें) विभाग द्वारा सडक़ निर्माण के इस्तेमाल में लाया जाएगा।

प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना में सडक़ निर्माण में प्लास्टिक का उपयोग जरूरी किया गया है। इसी तरह, जिला करनाल के नीलोखेड़ी खंड तथा जिला यमुनानगर के छछरौली, जगाधरी, सरस्वती नगर और रादौर खंडों में सह-उपचार के माध्यम से फीकल स्लज मैनेजमैंट किया जा रहा है।

यह भी बताया गया कि हरियाणा ग्रामीण विकास निधि (एचआरडीएफ) के तहत ग्र्रामीण क्षेत्रों में गलियों, सडक़ों, ग्राम पंचायतों में डिस्पेंसरियों, जलापूर्ति, सेनिटेशन व अन्य सुविधाओं का निर्माण किया जाता है। सामाजिक स्वास्थ्य सुविधाओं में भी इस पैसे का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 11 अक्तूबर, 2020 को शुरू की गई स्वामित्व योजना के तहत 228 गांवों के नक्शों को अंतिम रूप दिया गया है।

इसके तहत लगभग 30 हजार प्रॉपर्टी डीड्स वितरित की गई हैं। पार्क-सह-व्यायामशाला योजना के तहत 590 पार्क विकसित किए गए हैं, जबकि 351 का कार्य प्रगति पर है। ग्राम पंचायत तथा सभी संबंधित विभागों के ग्राम स्तर के पदाधिकारियों के लिए एक आईटी सक्षम प्रशासकीय कॉम्पलेक्स मुहैया करवाने के मकसद से प्रदेश में अब तक 1855 ग्राम सचिवालय स्थापित किए गए हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत को विशिष्ट पहचान दिलाने के उद्देश्य से हाल ही में ग्राम दर्शन योजना शुरू की गई है।


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