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इनेलो ने भारत सरकार को लिखा पत्र, जानिये क्या है वजह ?

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Yuva Haryana

Chandigarh, 21 June, 2019

इनेलो ने भारत सरकार को एक पत्र लिखकर इस बात पर विरोध जताया है कि अभी हाल में प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित वह बैठक जिसमें ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ को लेकर विभिन्न राजनैतिक दलों के साथ विचारविमर्श करना था, उसमें उसे आमंत्रित नहीं किया गया।

इनेलो ने याद दिलाया कि यह एक ऐसा विषय है जिसका संबंध राज्यों से उतना ही है जितना केंद्र से, इसलिए क्षेत्रीय दलों को ऐसे संवाद के लिए अवश्य बुलाया जाना चाहिए। इस विषय पर किसी भी संवाद को करते समय सभी मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दलों के विचारों को जानना आवश्यक हो जाता है।

यह एक ऐसा विषय है जिसके बारे में अतीत में भी विचारविमर्श किया गया है और इनेलो ने हमेशा यह कहा है कि भले ही ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ वित्तीय एवं अन्य मानदण्डों के आधार पर एक आकर्षक निर्णय लगता है लेकिन इस पर और अधिक गहन विचारविमर्श की आवश्यकता है।

इनेलो का मानना है कि लगभग सभी राज्यों की अपनी विशेष समस्याएं होती हैं जिनका एकसमान समाधान नहीं हो सकता। उसकी अपनी विशेषताओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक राज्य के लिए अलग-अलग योजनाएं एवं समस्याओं के हल तलाश करने जरूरी हो जाते हैं। इसीलिए इतने महत्वपूर्ण विषय को लेकर जब प्रधानमंत्री राजनैतिक दलों से  संवाद कर रहे हों उसमें इनेलो जैसा दल जो राज्य में अनेक बार सरकार बना चुका हो, उसके विचार जानना भी नितांत आवश्यक हो जाता है।

अपने पत्र में इनेलो ने यह भी कहा है कि संविधान के निर्माताओं ने इन सभी समस्याओं पर संविधान को बनाने के समय गौर किया गया था और इसे पहचानते हुए ही संविधान को अद्र्धसंघीय ढांचा दिया गया था। इस ढांचे के कारण ही देश के समक्ष आने वाले सभी विषयों का वर्गीकरण करते हुए केंद्रीय सूची, राज्य सूची और दोनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सूचियों को भी स्पष्ट रूप से लिखा गया था। अब जबकि सरकार एक ऐसे ढांचे को बनाना चाहती है जिसमें कुछ परिस्थितियों में राज्यों के अपने मुद्दे राष्ट्र के मुद्दों के सामने गौण पड़ सकते हंै तो इससे संविधान के संघीय ढांचे में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन की सम्भावना है। ऐसा कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी छोटे-बड़े राजनैतिक दलों, सिविल सोसायटी एवं इस विषय का अध्ययन करने वाली संस्थाओं और लोगों के विचारों को भलीभांति जान लेना चाहिए। ऐसा करने के उपरांत ही बदलाव संबंधी कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।

 

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