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अंधविश्वास: माता-पिता ने अपने एक माह के बच्चे को मंदिर में चढ़ाया, तभी पहुंच गई पुलिस और फिर…

Yuva Haryana, Hansi

हरियाणा के हिसार जिले के हांसी शहर से अंधविश्वास का बेहद ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बता दें कि यहां पर महज एक महीने के नवजात बच्चे को उसके माता-पिता ने हांसी समाधा मंदिर में साधुत्व के लिए दान कर दिया।

लेकिन इसी दौरान पुलिस को भनक लग गई जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और अंधविश्वास में डूबे बच्चे के माता-पिता व मंदिर महंत को चौकी में तलब कर लिया। पुलिस कार्रवाई की गाज गिरते देख परिवार ने बच्चा मंदिर से वापस ले लिया व उसकी परवरिश का भी वादा किया।

बता दें कि समाधा मंदिर में कुछ लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर बच्चे को पूर्व में भी चढ़ा चुके हैं। बुधवार को तीसरे बच्चे को मंदिर में महंत को सौंपा गया था। डडल पार्क निवासी फ्रूट व्यापारी ने अपने एक महीने के बच्चे को मंदिर में चढ़ाया था। मंदिर में महंतों व परिवार के सदस्यों की मौजूदी में पूरी रस्म करने के बाद बच्चे का नामकरण नारायण पुरी कर दिया गया। पुलिस ने मामला संज्ञान में आते ही दोनों पक्षों को थाने में तलब कर लिया।

दोनों पक्षों की तरफ से काफी संख्या में लोग सिसाय पुलिस चौकी पहुंच गए। पुलिस ने परिवार को कानूनी धाराओं से अवगत करवाते हुए परिवार के सदस्यों को समझाया और कार्रवाई की चेतावनी दी। आखिर परिवार के लोग मान गए और बच्चे की परवरिश का आश्वासन देते हुए वापिस ले लिया। इस संवेदनशील मामले में पुलिस पूरा दिन गंभीरता से काम में लगी रही है।

समाज सुधार में एक जिम्मेदार नेताओं की भी होती है, लेकिन हैरत की बात है कि मंदिर में कई नेता भी बच्चे को सुपुर्द करने की रस्म के समय हाजिर थे। इन नेताओं ने भी परिवार को समझाने की जहमत नहीं उठाई और परंपरा के नाम पर सब देखते रहे।

मंदिर के गदीनशीन महंत पांचम पुरी ने बताया कि मंदिर में परिवार के लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर बच्चा चढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि एक महीने बाद एक और परिवार द्वारा बच्चा मंदिर में चढ़ाया जाना है। लेकिन पुलिस की कार्रवाई के बाद मंदिर प्रशासन इस पूरे प्रकरण में शांत है इससे कुछ महीने पूर्व भी मंदिर में एक बच्चा ऐसे ही एक परिवार ने दान किया था, जिसका नाम पूनम पुरी रखा गया है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता अर्जुन का इस मामले पर कहना है कि कानून में बच्चे के भी अधिकार सुनिश्चित हैं। बच्चे के 18 वर्ष तक परवरिश की जिम्मेदारी माता-पिता की है। इस प्रकार से बच्चे को दान करना जुवेनाइल जस्टिस एक्ट व बच्चों को संरक्षण के लिए बने कई अन्य एक्ट का उल्लंघन है। बच्चों को संरक्षण के लिए कानून में काफी सेफगार्ड हैं व वर्तमान में तो गोद लेने के नियमों को भी सरकार ने काफी सख्त कर दिया है।

एसपी नितिका गहलोत ने बताया की मंदिर में छोटा बच्चा दान देने का मामला संज्ञान में आया था. मासूम बच्चे को इस प्रकार से बगैर कानूनी प्रक्रियाओं के किसी को सौंपना गलत है। बच्चे के माता-पिता को पुलिस ने समझाया है। बच्चे के पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी माता-पिता को होती है। परिवार को चेतावानी दी गई है कि भविष्य में ऐसी शिकायत मिलने पर पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी।

सिसाय पुलिस चौकी इंचार्ज ने बताया की पुलिस ने दोनों पक्षों को चौकी में तलब किया। बच्चे के परिवार ने कहा कि वह तो मंदिर में पूजा करने गए थे। लेकिन पुलिस ने लिखित में परिवार से आश्वासन लिया है कि वह बच्चे का पालन पोषण करेंगे। मंदिर प्रशासन को भी इस बारे में चेतावानी दी गई है।

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