Home Breaking क्योड़क बनेगा हरियाणा का पहला ऐसा गांव, जहां पर तालाब के पानी से होगी सिंचाई, जानिये योजना

क्योड़क बनेगा हरियाणा का पहला ऐसा गांव, जहां पर तालाब के पानी से होगी सिंचाई, जानिये योजना

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Sahab Ram, Chandigarh

 हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि कैथल जिले का क्योडक़ गांव प्रदेश का ऐसा पहला गांव होगा जिसके तालाब के पानी को उपचारित कर सिंचाई व अन्य कार्यों के लिए उपयोग किया जाएगा और यह तालाब एक मॉडल तालाब होगा जिसका अनुसरण  हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों के पानी को उपचारित करने के लिए अपनाई जा रही तीन पोंड व पांच पोंड प्रणाली में किया जाएगा।
उप-मुख्यमंत्री, जिन के पास विकास एवं पंचायत विभाग का प्रभार भी है, ने इस सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि भू-जल संरक्षण के लिए क्रियान्वित की जा रही ‘‘मेरा पानी-मेरी विरासत’’ योजना के बाद प्रदेश में पानी की एक-एक बूंद का उपयोग हो, इसके लिए सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा तालाबों के पानी को उपचारित कर पुन: उपयोग में लाने की योजनाएं तैयार करना भी इसी कड़ी का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि क्योडक़ के तालाब का लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है तथा सम्भवत: 15 जुलाई, 2020 तक इसे लोकार्पित कर दिया जाएगा।
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि पहले चरण में जिन 18 तालाबों को मॉडल तालाब के रूप में विकसित किया जाएगा उनमें कैथल जिले का क्योडक़ गांव का तालाब जो लगभग 35 एकड़ क्षेत्र में  होगा, झझर जिले का 3.9 एकड़ में जाखौदा गांव का, करनाल जिले के 8.5 एकड़ में साग्गा का, 27 एकड़ में पाढा गांव का, 10.5 एकड़ में काछवा का तथा 11 एकड़ में गौंदर गांव का, एक एकड़ में अम्बाला जिले का तेपला गांव का, 5.26 एकड़ में कुरुक्षेत्र जिले का दयालपुर गांव का, सोनीपत जिले के कासंडी गांव के 5.5 एकड़ तथा 2.5 एकड़ के दो  तालाब, रोहतक जिले के बालद गांव का 3 एकड़ क्षेत्र का,  बहु-अकबरपुर के आठ व एक एकड़ के दो तालाब, निंडाना टिकरी का 8.5 एकड़ का तथा बनियानी गांव का 2.05 एकड़ का तालाब, पलवल जिले के 22 एकड़ क्षेत्र में औरंगाबाद गांव का तालाब तथा 3.5 एकड़ क्षेत्र में  हिसार जिले का राखीगढ़ी का तालाब शामिल हैं।
उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि मॉडल तालाब के लिए 11 बिंदुओं पर मुख्य रूप से ध्यान केन्द्रित किया जाएगा जिनमें तालाब में इनलेट और आउटलेट का आवश्यक होना, ताताबी के ओवरफलोइंग का उचित समाधान करना, तालाब में पानी की न्यूनतम गहराई 8 फूट बनाए रखना, तालाब में समतल सतह,  हरित पट्टïी तथा जल ग्रहण क्षेत्र का होना, तालाब में डीपीडी तार की जाली को होना, तालाब की ग्रीन बेल्ट में प्राकृतिक पेड़-पौधे होने चाहिए। तालाब की जैव विविधता होनी चाहिए अर्थात मछली, कछुए, मेंढक, सांप, कमल के फूल की खेती, बत्तख, कैना तथा तालाब की प्रकृति के अनुसार जंगली घास व अन्य जड़ी बूटी होनी चाहिए। गायों के लिए एक मार्ग और गऊ घाट तथा अन्य जानवरों लिए मार्ग का प्रावधान होना चाहिए। तालाब के सौंदर्यीकरण तथा इसकी गहराई व डी-सिल्टिंग समय पर होनी चाहिए।  तालाब के तट साफ होने चाहिए तथा चारों ओर रिटेनिंग वॉल का प्रावधान किया जाना शामिल है।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में प्रदेश में कुल 16,350 तालाब हैं, जिनमें 15,910 तालाब ग्रामीण क्षेत्रों में हैं और 440 तालाब शहरी क्षेत्रों में हैं तथा सभी तालाबों की जीआईएस मैपिंग कर पोन्ड एटलस तैयार की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों के 2606 तालाब प्रदूषित तथा ओवरफ्लोविंग हैं, 7963 प्रदूषित हैं परंतु ओवरफ्लोविंग नहीं हैं, 4413 तालाबों का पानी साफ है। प्रदूषित तालाबों के पानी को उपचारित करने के लिए कन्सट्रक्टिड वेटलैंड टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा तथा हर तालाब की पानी की निकासी के सोलर पम्प प्रणाली लगाई जा रही है।
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