Home Breaking हरियाणा में बड़े स्तर पर वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश, नकली आरसी बनाकर लाखों रुपये में बेचते थे लग्जरी कार

हरियाणा में बड़े स्तर पर वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश, नकली आरसी बनाकर लाखों रुपये में बेचते थे लग्जरी कार

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Kapil Sharma, Yuva Haryana, Meham

हरियाणा के महम एसडीएम ऑफिस में बड़े स्तर पर वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। यहां पर लग्जरी गाड़ियों को वैध बनाने का बड़ा रैकेट चल रहा था, जिसके एसडीएम ऑफिस के कर्मचारी भी शामिल है। इस गिरोह के लोग चोरी की गाड़ियों पर आरसी के हिसाब से चेसिज, मॉडल नंबर बदलते थे और लाखों रुपये में बेच देते थे।

एसटीएफ गुरुग्राम ने इस रैकेट का भांडाफोड़ करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ टीम का मामला है कि अब तक एसडीएम ऑफिस से 562 के करीब फर्जी वाहन रजिस्ट्रेशन बनवा चुका है। इस मामले में 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इनमें महम एसडीएम ऑफिस के एमआरसी अनिल,कम्प्यूटर ऑपरेटर सैमाण निवासी कृष्ण व कांट्रेक्ट बेस पर कार्यरत डेटा एंट्री ऑपरेटर खरकड़ा का सोमबीर शामिल है।

जो अन्य 8 लोग हैं उनमें सैमाण का रमेश बामल, महम के वार्ड 5 का अमित, सीसर खास का रमेश, दादरी के घसोला का सोमबीर, दादरी का धर्मबीर, बालसंद का सूबे सिंह, सीसर खास का जसवंत उर्फ काला व दादरी का प्रवीन शामिल है। एसटीएफ के गुरुग्राम यूनिट इंचार्ज इंस्पेक्टर सतीश देशवाल ने बताया कि एमआरसी अनिल, सोमबीर और कृष्ण को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों को कोर्ट में पेश कर 4 दिन के रिमांड पर लिया है।

एसटीएफ टीम ने बताया कि चरखी दादरी में एक स्कोर्पियों गाड़ी के पकड़े जाने के बाद इस रैकेट का खुलासा हुआ है। पुलिस को मुखाबिर से सूचना मिली थी कि यह स्कॉर्पियो गाड़ी चोरी की है, जब पुलिस ने पकड़ा तो गाड़ी के कागजात और चेसिज नंबर सही मिले थे, लेकिन मुखाबिर ने बताया कि यह गाड़ी चोरी की है, जिसके बाद आरोपी प्रवीण से गहनता से पूछताछ की गई तो आरोपी ने महम एसडीएम ऑफिस से आरसी तैयार करवाने का राज खोल दिया।

एसटीएफ की टीम ने आरोपी प्रवीण से पूछताछ कर चोरी की फॉर्च्यूनर, स्कोर्पियो, इनोवा समते 17 गाड़ियां अलग-अलग स्थानों से बरामद की है। ये गिरोह इन गाड़ियों को लाखों रुपये में बेच देता था।

पुलिस की जांच में सामने आया है कि महम एसडीएम ऑफिस से जारी हुई सारी आरसी में वाहनों के वो नंबर हैं, जो कि पहले से ही जेसीबी, स्कूटर, मोपेड, कार, ट्रैक्टर या ट्रक को जारी किये जा चुके थे। एसडीएम ऑफिस के कर्मचारी रिकॉर्ड को जांचकर उन्ही नंबरों पर नई आरसी अलॉट करते थे, ऐसे मॉडल की आरसी भी तैयार करते थे, जो वाहन बंद हो चुके हो।

पुलिस जांच में सामने आया है कि महम से जारी आरसी में सोनीपत अथॉरिटी के 56 ऐसे नंबर मिले हैं, जो महम से चोरी की लग्जरी गाड़ियों को अलॉट किये गए हैं। जबकि ये नंबर सोनीपत में स्कूटर, जेसीबी, बाइक या फिर मोपेड के नाम से हैं।

जांच में सामने आया है कि एसडीएम ऑफिस के कर्मचारी वाहन पोर्टल साफ्टवेयर के जरिये गाड़ियों के वीआईएन नंबर बदल देते थे। जिस वजह से गाड़ी जल्दी पकड़ में नहीं आती थी। इतना ही नहीं चोरी के वाहन खरीददारों को आरोपी कंपनी की बजाय लोकल मिस्त्री से ही सर्विस वगैरा करवाने की हिदायत देते थे।

एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि महम एसडीएम ऑफिस में जिन वाहनों की आरसी तैयार की गई है। उन वाहनों की अब ज्यादातर फाइलें ही गायब हो गई है। जांच में सामने आया है कि गाड़ियों के मैनुअल रिकॉर्ड को गायब किया गया है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि एसडीएम ऑफिस के बाहर बैठने वाले टाइपिस्ट ने इस सारे खेल को यहां से जोड़ा था। उसी ने कर्मचारियों को चोरी की गाड़ियों की आरसी बनाने के लिए राजी किया था। यहां पर चोरी की एक गाड़ी की आरसी के लिए 25 से 30 हजार रुपये कीमत होती थी।

 

 

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